Kuch Alfaaz

आग़ाज़ की तारीख़ इक मुसाफ़िर हूँ बड़ी दूर से चलता हुआ आया हूँ यहाँ राह में मुझ से जुदा हो गई सूरत मेरी अपने चेहरे का बस इक धुँदला तसव्वुर है मिरी आँखों में रास्ते में मिरे क़दमों के निशाँ भी होंगे हो जो मुमकिन तो उन्हीं से मिरे आग़ाज़ की तारीख़ सुनो

WhatsAppXTelegram
Create Image