"आज कल" मैं रोज़ जब घर से निकलता हूँ तो मैं ये सोचता हूँ आज इस मुश्क़िल घड़ी का आख़िरी दिन हो मगर ऐसा नहीं होता कभी तो कुछ हो जाता है कभी सब कुछ खो जाता है मिलेगा जाने कब इन मसअलों का हल बहुत बेचैन हूँ मैं आज कल
Create Image"आज कल" मैं रोज़ जब घर से निकलता हूँ तो मैं ये सोचता हूँ आज इस मुश्क़िल घड़ी का आख़िरी दिन हो मगर ऐसा नहीं होता कभी तो कुछ हो जाता है कभी सब कुछ खो जाता है मिलेगा जाने कब इन मसअलों का हल बहुत बेचैन हूँ मैं आज कल
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