Kuch Alfaaz

आज माँ ने मेरी आँखों पे हथेलिआं रखीं पलकों के नीचे उबल रहे जवालामुखी एक पल में बर्फ हो गए मानो माँ को पता हो मेरी तपती हुई पुतलिओं का राज़ मानो माँ ने मेरी आँखों से कभी पढ़ लिया हो नाम तेरा कई बार लगा के माँ ने मुझे रोते हुए देख लिया है रोने से पहले ही कई बार लगा के माँ ने वो सारी बातें सुन लीं हैं जो तू ने बिछड़ते वक़्त छिपालीं मुझ सेे और तो और कई बार लगता है माँ ने मेरी वो कवितायेँ भी पढ़ी हैं जो अभी लिखनी हैं मैं ने

Yuvraj Dutt
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