आज वारिस शाह से कहती हूँ - अपनी क़ब्र में से बोलो! और इश्क़ की किताब का कोई नया वर्क़ खोलो! पंजाब की एक बेटी रोयी थी, तू ने एक लंबी दास्तान लिखी, आज लाखों बेटियां रो रही हैं वारिस शाह! तुम से कह रही हैं: ऐ दर्दमन्दों के दोस्त, पंजाब की हालत देखो चौपाल लाशों से अटा पड़ा है, चनाब लहू से भर गया है... किसी ने पांचों दरियाओं में एक ज़हर मिला दिया है और यही पानी धरती को सींचने लगा हैइस ज़रखेज़ धरती से ज़हर फूट निकला है देखो, सुर्खी कहाँ तक आ पहुंची! और क़हर कहाँ तक आ पहुंचा! फिर ज़हरीली हवा वन-जंगलों में चलने लगी उस में हर बांस की बांसुरी जैसे एक नाग बना दी...नागों ने लोगों के होंठ डस लिए और डंक बढ़ते चले गए और देखते-देखते पंजाब के सारे अंग काले और नीले पड़ गए हर गले से गीत टूट गया, हर चरखे का धागा छूट गया सहेलियां एक-दूसरे से बिछुड़ गईं, चरखों की महफ़िल वीरान हो गयीमल्लाहों ने सारी किश्तियां सज के साथ ही बहा दीं पीपलों ने सारी पेंगें टहनियों के साथ तोड़ दीं जहाँ प्यार के नग़ में गूंजते थे वो बांसुरी जाने कहाँ खो गई और राँझे के सब भाई बांसुरी बजाना भूल गए...धरती पर लहू बरसा, क़ब्रें टपकने लगीं और प्रीत की शहज़ादियां मज़ारों में रोने लगीं... आज सभी 'कैदो' बन गए - हुस्न और इश्क़ के चोर मैं कहाँ से ढ़ूंढ़ कर लाऊं एक वारिस शाह और वारिस शाह! मैं तुम सेे कहती हूँ अपनी क़ब्र से बोलो और इश्क़ की किताब का कई नया वर्क़ खोलो!
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