Kuch Alfaaz

आख़िर क्यूँ है अभी तो वक़्त ये कड़क धूप का है फिर ये सूरज इतना लाल क्यूँ है ये तो शहर का सब सेे रईस आदमी है नए इस तरह कंगाल क्यूँ है ये हाथ में तुम क्या छुपा रही हो उँगली पर ये अँगूठी का निशान क्यूँ है ये चिड़ियां उड़ क्यूँ नहीं पा रहीं इन के पैरों में लगी ये लगाम क्यूँ है क्या कहा तुम ने मैं मर रहा हूँ फिर मुझे बचाने का इतना तामझाम क्यूँ है

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