Kuch Alfaaz

आख़िरी यार इक पेड़ था मेरे घर के पीछे उस पर इक पंछी का डेरा था घंटों बातें होती थी मेरी उस से इकलौता यार वो मेरा था फिर इक आंधी आई और पेड़ टूट गया हुनरबाज था पंछी उस ने बसा लिया नया आशियाँ ग़र मुझ सेे मेरा यार छूट गया हे ईश्वर क्या ख़ता हुई मुझ सेे रहम कर आख़िर क्यूँ तू मुझ सेे इतना रूठ गया

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