Kuch Alfaaz

ख़्वाब है या कोई तसव्वुर है ये तवाज़ुन ये फ़िक्र का मीज़ान इतना गहरा ख़मोश आवाज़ा हर तहर्रुक ब-क़द्र-ए-अंदाज़ा बे-हिसारी का ये मा'दूम हिसार काएनातों का बे-शुमार शुमार क़ुल्ज़ुम-ए-बे-कनार का आलम आलमों के ग़ुबार का आलम कहकशाओं के हार ला-महदूद मेहर-ए-बे-इख़्तियार ला-महदूद बेहद-ओ-बे-हिसाब सय्यारे दाग़ बे-दाग़ बे-पनह तारे ऐसा बे-अंत है ख़ला क्यूँँकर ये ख़ुदा गर है ये ख़ुदा है गर इस हक़ीक़त की क्या हक़ीक़त है जुज़ तसव्वुर कहाँ ये वुसअ'त है

Faisal Azeem
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