Kuch Alfaaz

आम जो खाए वो ललचाए जो न खाए वो पछताए भीनी भीनी ख़ुशबू आए जो सब के ही मन को भाए लंगड़ा चौसा और दसहरी कोई नहीं है इन का बैरी सोने जैसी रंगत इन की डाली डाली संगत इन की अब्बा जब बाज़ार को जाते टोकरी भर आमों की लाते सारे फलों का आम है राजा कच्चा पक्का सब का खा जा ख़ुशबू इस की भीनी भीनी मीठा गुड़ है मीठी चीनी ख़ुद खाएँ औरों को खिलाएँ खाने से जी भर न पाएँ सब से अच्छी बात ये ही है गर्मी की सौग़ात ये ही है

Iffat Zarrin
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