आँखें तुम्हारी बहुत ख़ूब-सूरत हैं आँखें तुम्हारी बना दो इन्हें आज क़िस्मत हमारी इन्हीं की बदौलत जहाँ में ख़ुशी है इन्हीं की बदौलत यहाँ रौशनी है अगर देख लें ये परेशाँ जिगर को तो हो जाए फ़ारिग़ वो दिल उम्र-भर को ख़ुदा ने भी इन की नज़र है उतारी बहुत ख़ूब-सूरत हैं आँखें तुम्हारी बना दो इन्हें आज क़िस्मत हमारी है कितनी मोहब्बत इन आँखों से हम को अगर पास आओ तो बतलाएँ तुम को इन आँखों के दम से ही ज़िंदा हैं हम तो बिना इन के फाँसी का फंदा हैं हम तो इन्हें देखते रोक कर सब सवारी बहुत ख़ूब-सूरत हैं आँखें तुम्हारी बना दो इन्हें आज क़िस्मत हमारी यही कह रहे हैं ये चंदा सितारे तुम्हारी निगाहें हैं आलू बुखारे कोई देख कर कैसे ख़ुद को संभाले इन्हें क्यूँँ न वो दिल में अपने बसा ले इन आँखों की करते हैं पूजा पुजारी बहुत ख़ूब-सूरत हैं आँखें तुम्हारी बना दो इन्हें आज क़िस्मत हमारी
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