Kuch Alfaaz

किस बात का है ग़ुस्सा कुछ तो बताओ क़िस्सा बैठी हो क्यूँ अकेली आओ मिरी सहेली बिखरे ये बाल क्यूँ हैं आँखें भी लाल क्यूँ हैं क्यूँ हो बनी पहेली आओ मिरी सहेली टॉफ़ी तुम्हें खिलाऊँ झूला तुम्हें झुलाऊँ चलना मिरी हवेली आओ मिरी सहेली अब हँस भी दो ज़रा सा लाए हैं मेरे प्यारे गुड़िया नई नवेली आओ मिरी सहेली

Rafi Ahmad
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