Kuch Alfaaz

आप कहते कि उन्नति हुई है फैलती जा रही भुखमरी है आप कहते कि उन्नति हुई है दौर मँहगाइयों का बढ़ा है मौत का भी बिगुल बेसुरा है आर्थिक युद्ध ऐसा अनोखा हर तरफ़ दिख रहा सिर्फ़ धोखा आग सीमाओं पर भी लगी है आप कहते कि उन्नति हुई है रोग बढ़कर मिटाता जनों को बंद भी है सताता जनों को है बुरे हाल में जन सुरक्षा कम हुई राजनीतिक तितिक्षा ऑक्सीजन तलक घट रही है आप कहते कि उन्नति हुई है रोमियो के विरोधी बने तुम लैला मजनूॅं के रोधी बने तुम प्रेम प्रतिबंध तुम ने लगाया कृष्ण राधा तलक को रुलाया इतना प्रतिबन्ध कब लाज़िमी है आप कहते कि उन्नति हुई है नोट-बन्दी ने जनगण हिलाया कालाधन लौट फिर भी न आया आज नीरव व माल्या अडानी लूटते देश का माल पानी झोपडों में ग़रीबी पड़ी है आप कहते कि उन्नति हुई है सब किसानों जवानों दुकानों टपरियों गाँव के घर मकानों टैक्स भरना बहुत है ज़रूरी है विकासों में अब कुछ ही दूरी देवी उत्पाद-शुल्का खड़ी है आप कहते कि उन्नति हुई है दोगुनी आई पाते किसानों वस्तु उत्पाद देती दुकानों टैक्स भरते हुए शौर्यवानों और तलते पकौड़े जवानों सबने ख़ुद ही चुनी बे-बसी है आप कहते कि उन्नति हुई है

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