Kuch Alfaaz

"आशियाना-ए-दिल" प्रेम के गीत अपने मैं, लिखता रहूँ मेरे गीतों को तुम, गुनगुनाया करो मेरा दिल भी तेरा, अबसे घर बन चुका इस नए घर में तुम, आया जाया करो

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