Kuch Alfaaz

पेड़ों के पत्ते जलती दोपहरों को आने जाने वालों को साया देते हैं अपने होने का एलान नहीं करते साए का एलान नहीं करते मैं घर से बिछड़ा था जब तो अक्सर बरसों जलती धूप में उन की शफ़क़त के साए में सोया था कुछ दिन से दूर दूर तक आसमान में आग दूर दूर तक प्यासे जलते-बुझते लोग बादल बारिश सब्ज़ा पत्ते पौदे पेड़ भूले-बिसरे ख़्वाब दूर दूर तक शो'लों के तूफ़ान का मौसम आया सब के सिर पर आने वाले मौसम के एलान का घटता-बढ़ता साया ये कैसा मौसम आया

Balraj Komal
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