Kuch Alfaaz

"शाइराना मिज़ाज" अबकि पास आए हो ख़ुश्बूओं के साए हो कल तलक तो मेरे थे आज तुम पराए हो उम्र भर की चाहत की रुख़्सती नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते सादगी से आओगे बे-रुखी से जाओगे मेरे पास आए हो किस का दिल दुखाओगे दिलजलों से जान-ए-जानाँ दिल-लगी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते ख़ार मुस्कुराए थे फूल मुँह बनाए थे मैं ने ख़्वाब बेंचा था मैं ने दिल उगाए थे मैं कि जैसे करता था आदमी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते बे-वफ़ाई आदत है बे-हयाई फ़ितरत है मेरे जैसे आशिक़ हैं आशिक़ी पे लानत है जानाँ मेरे जैसों से मुँह-लगी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते हुस्न पे लिबादा है दर्द भी कुशादा है ज़ेहन का तो फिर भी ठीक दिल नहीं अमादा है यूँँ पराई रौशनी से रौशनी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते ख़ार बोए जाएँगे ख़ाक अब उड़ाएँगे मैं ने तुम को चाहा था और अब भुलाएँगे तुम सेे बैर नहीं करते प्यार भी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते दिल से आगे जाना है पेट चुन के आना है हाथ जिस का थामा है उम्र भर निभाना है उम्र भर के साथी को यूँँ दुखी नहीं करते कहता था न शाइरों से आशिक़ी नहीं करते

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