Kuch Alfaaz

"अभी जाओ" अभी जाओ की तन्हाई से रुख़्सत हो जाऊँ तो आना दिल रोए, मैं मुस्कुराऊँ तो आना अभी कुछ कहने, सुनने की इच्छा नहीं हाँ, कुछ कह पाऊँ कुछ सुन पाऊँ तो आना अभी जाओ जाओ इस क़दर कि तुम्हें रोकना चाहूँ तो न रोक पाऊँ जाओ इस क़दर कि तुम्हें मुस्कुराता देख मैं भी मुस्कुराऊँ जाओ अभी जाओ अभी जाओ के दर्दों को सीने से लगाना है मुझे अभी जाओ की ख़ुद को कहीं छुपाना है मुझे अभी ग़म है कहीं सीने में जगा हुआ ग़मों से नाता तोड़ लूँ तो आना अपनी आँखें निचोड़ लूँ तो आना अभी जाओ

Vikas Sangam
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