“अभी न जाओ छोड़ कर” अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं नज़र अभी लड़ी नहीं नशा अभी चढ़ा नहीं अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं अभी तो दिन ढ़ला है ये अभी तो रात आई है अज़ल के बा'द आज फिर फ़ज़ा ये मुस्कुराई है फ़ज़ा को मुस्कुराने दो ये दिल बहक भी जाने दो कि अब न रोको ख़ुद को तुम ये दूरियाँ मिटा दो तुम हवाओं में ये दिल उड़े कि प्यार के चमन खिलें ये रात भी दिवानी है फ़ज़ा भी ये सुहानी है कि बाहों में मुझे भरो यूँँ जाने की न ज़िद करो अभी तो देखो चाँद भी चकोर से मिला नहीं अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं ज़रा ठहर भी जाओ साथ बैठ लो कुछ और पल कि थाम लूँ ये वक़्त मैं कि लिख दूँ फिर कोई ग़ज़ल तुम्हें बताऊँ आज जो कभी न तुम सेे कह सका तुम्हें दिखाऊँ अश्क जो तुम्हारे बिन न बह सका हसीन हो गई हो तुम जवान हो गया हूँ मैं बहार बन गई हो तुम मसान बन गया हूँ मैं कि कर दो अब हरा मुझे ग़मों से अब रिहा मुझे तरस ज़रा तो खाओ तुम मैं इतना भी बुरा नहीं अभी न जाओ छोड़ कर कि दिल अभी भरा नहीं
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