Kuch Alfaaz

"अगर तू होता" अगर तू होता मुसाफ़िर तो मुझे तेरी मंज़िल होना क़ुबूल होता अगर तू होता छँद तो मुझे तेरी कविता होना क़ुबूल होता अगर तू लिखता इश्क़ तो मुझे तेरे पन्नो में क़ैद होना क़ुबूल होता अगर तू गुज़रता हवा सा तो मुझे तेरे झुमके होना क़ुबूल होता अगर तू होता क़ैद खाना तो मुझे मुज़रिम होना क़ुबूल होता अगर तू होता तो सब हसीन तेरे बगैर सब कुछ फ़िज़ूल होता अगर तू होता साथ तो क्या ख़ुशियाँ ग़म भी क़ुबूल होता तू जैसा भी होता मुझे क़ुबूल होता?

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