Kuch Alfaaz

तख़्लीक़ के ख़ुमार में चूर एक ख़ुश-गवार मोड़ में उस ने जब बे-हिसाब लोगों के नसीब में ख़ुशियाँ लिख डाली होंगी बे-शुमार तब उस ने रुक कर सोचा होगा तवाज़ुन की ख़ातिर कुछ तो तब्दीली चाहिए और यूँँ उस मोड़ में लिख कर अगला नसीब उस ने जो पल्टा सफ़्हा वो मेरा था

Umar Farhat
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