"ऐसा कहाँ होता है" सही सुना था जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है वैसे तो इश्क़ मेरा इक तरफ़ा ही था उस के दरमियाँ वरना दो तरफ़ा मोहब्बत में बे-वफ़ाई हो जाए ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है अगर इश्क़ में लैला नहीं थी वो, तो मजनू नहीं हूँ मैं अगर इश्क़ में हीर नहीं थी वो, तो रांझा भी नहीं हूँ मैं उसे सच्चा इश्क़ होता तो आ कर बताती मुझे वरना इश्क़ में वफ़ा करने पर, ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है मैं इश्क़ ज़ाहिर करता रहा वो बे-वफ़ाई से कभी बाज़ ना आई मैं इश्क़ में उस के क़रीब आता रहा पर वो कभी मेरे पास ना आई मैं बड़ी शिद्दत-मुद्दत से पाना चाहता था उसे फिर सोचता हूँ कि ये सब करने पर भी इश्क़ में ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है अक्सर उस की बे-वफ़ाई के क़िस्से सुना करता था मैं कभी दोस्तों से तो कभी ग़ैरों से सुना करता था मैं इश्क़ था "कुशल" को इस लिए यक़ीं न हुआ वरना दोस्तों की बातों पर शक हो जाए ऐसा कहाँ होता है सही सुना था जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है वैसे तो इश्क़ मेरा इक तरफ़ा ही था उस के दरमियाँ वरना दो तरफ़ा मोहब्बत में बे-वफ़ाई हो जाए ऐसा कहाँ होता है
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