Kuch Alfaaz

मेरी शोरिश जुदा आँखों ने मुझ से यूँँ कहा कल शब ये धीमी आँच का जलना तुझे दीवाना कर देगा मैं क्या करता कहाँ जाता कि हाइल था मिरे सीने में इक महबूस सन्नाटा तअ'य्युन कौन करता हम कहाँ पर ख़ेमा-ज़न हैं मुसल्लत है सरों पर कौन सा मनहूस साया और ऐसे में तलातुम रोज़-ओ-शब तेरी लगन का जान लेवा है बड़े ही जाँ-गुसिल हैं तेरी चाहत के सनम-ख़ाने मोहब्बत ख़ून-ए-दिल क्यूँ है तमन्ना सोज़-ए-जाँ क्यूँ है रफ़ीक़ान-ए-सफ़र इतना बताना आरज़ू एक अलमिया क्यूँ है

Ekram Khawar
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