"अलविदा" जो सपने सजाए बरसों उन के बिखरने का वक़्त आ गया अलविदा ऐ दोस्त मेरे मरने का वक़्त आ गया मुज़्दा-ए-इशरत-ए-अंजाम मिला है अब जा कर कहीं मुझे आराम मिला है हद्द बहुत की हम ने हद्द से गुजरने का वक़्त आ गया अलविदा ऐ साथी मेरे मरने का वक़्त आ गया क़स में वादे मैं तोड़ के जा रहा हूँ साथ सभी का मैं छोड़ के जा रहा हूँ हर वादे से अपने अब मुकरने का वक़्त आ गया अलविदा ऐ सखा मेरे मरने का वक़्त आ गया
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