"अलविदा" मुझे याद है सब जो मैं ने सहा है सिला जो मोहब्बत का तुझ सेे मिला है भले तू न माने मेरे सामने पर तुझे भी ख़बर है कि तेरी ख़ता है ये गुस्ताख़ आँखें तेरी कह रही हैं कि तू जानती थी मुझे सब पता है हज़ारों मैं ता'रीफ़ें कर भी दूँ लेकिन यहाँ सब कहेंगे कि तू बे-वफ़ा है मैं चाहूँ तो लाखों सवालात कर लूँ पर अब इन सवालों का क्या फ़ाएदा है गुनाहों की तेरे सज़ा चाहे जो हो सलामत रहे तू मेरी ये दुआ है बस इक आख़िरी बार कर दे सितम और कि फिर आज हँसने को दिल कर रहा है मैं 'रेहान' हूँ ग़ौर से देख मुझ को था आशिक़ जो तेरा कहीं ला-पता है
Create Image