Kuch Alfaaz

धूप से तप रही है छत फ़र्श पर लेटी हुई है छिपकिली मक्खियाँ जालियों में छुप गईं हैं नालियों में घुस गए कुत्ते मैं कहाँ जाऊँ

Veneet Raja
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