अंदाज़ा गूँजा है पस-ए-अब्र ये नाला-ओ-फ़ुग़ाँ-ए-बिस्मिल चूम रही है सीना-ओ-पा ये लब-ए-लाशा सी बाद-ए-सर्द फैल रहा है साया हरसू बहर-ए-अर्श चड़क उठ्ठी है नस नस या तो बारिश होने वाली है या तो आज क़यामत का दिन है
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