Kuch Alfaaz

अँधियारा मानता हूँ कि मैं हूँ अँधियारा हाँ बहुत ख़ामियाँ भी हैं मुझ में ज़ुल्म होते हैं मेरे दामन में कई आँखें बरसती हैं मुझ में दूसरा नाम हूँ मैं दहशत का आइना हूँ उदास चेहरों का हाँ मैं ग़म-ख़्वार हूँ गुनाहों का सारे इल्ज़ाम हैं क़ुबूल मुझे पर मेरा इक सवाल है तुम सेे मेरे दामन में चाँद हँसता था चाँदनी नज़्म ए इश्क़ गाती थी जैसे देखे चकोरी चंदा को आँखें साजन को देख पाती थीं मैं भी तो आइना था ख़ुशियों का मेरे दामन में ज़ुल्म किस ने किए किस ने आँसू भरे इन आँखों में किस ने दहशत भरी ज़माने में है सबब कौन उदास चेहरों का मैं भी उस रब की ही इनायत था मुझ में भी सच का बोलबाला था मैं भी पहले कोई उजाला था मुझ को तुम ने बनाया अँधियारा

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