Kuch Alfaaz

अपने पैंरों पर ख़ुद खड़ा हूँ इस जहाँ में ख़ुद से लड़ा हूँ उन का कहा मानता नहीं अपनी ही जिद पे अड़ा हूँ ढूँढ़ रहा हूँ ख़ुद को ख़ुद में हीरा हूँ कि पत्थर में जड़ा हूँ जिस ने बनाया है मुझ को बस उस के दर पे पड़ा हूँ

Kumar Rishi
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