'आशिक़ी(ख़्वाब, हक़ीक़त और ख़ुदा)' कोई सूरत नज़र को लुभा जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई ख़ुशबू साँसों को भा जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कभी सरगम लबों पे छा जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई ख़्वाब दिल में समा जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है मेरा ख़्वाब था कि तुझे भाया करूँँ तेरे सपनों में मैं आया करूँँ बचाकर चाँद-सितारों की नज़र से तुझे फ़लक की सैर पे ले जाया करूँँ इस क़दर तू मुझ सेे प्यार करे मेरे फ़रेब पे भी ऐतिबार करे कभी राधा बनके तो कभी मीरा बनके हर जनम बस मेरा ही इंतिज़ार करे तू मुश्किलों में मेरा साया बने मुझे धूप लगे तो छाया बने जब हार जाऊँ मैं उम्मीदें सभी तू ईश्वर की कोई माया बने कोई माया ईश्वर भी पिरो न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई दिल ग़र चैन से सो न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कभी आँखें खुल के रो न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई ख़्वाब हक़ीक़त हो न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है इक हक़ीक़त जिस ने बस सितम किया हर बार आँखों को नम किया तुझे कितना मैं ने चाहा मगर तू ने न मुझ पर कोई करम किया तेरे इंतिज़ार में सदियाँ बीती मेरी हर ख़ुशी ज़िन्दगी से रूठी मेरी उम्मीदें सब सिमट कर रह गई बस तमन्नाऍं कुछ यूँँ टूटी मेरी अधूरा ख़्वाहिश-ए-गुलाब रह गया मेरा ख़्वाब बस इक ख़्वाब रह गया न हो सका वो मुकम्मल कभी बिन चकोर के ही मेहताब रह गया कोई चाँद चकोर बिन रह जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई काफ़िर नज़्में कह जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कभी आँख से पानी बह जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई बिन बोले सब सह जाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई कितना सहे ये बता दे ख़ुदा मेरा इश्क़ मुझे अब लौटा दे ख़ुदा छट जाए अँधेरा हर ख़ुशी से मेरी कोई ऐसी रौशनी तू दिखा दे ख़ुदा मेरी मन्नतों का तू लिहाज़ कर मेरे पागलपन का इलाज कर मैं करता फिरूँ शुक्रिया तेरा कुछ ऐसा मेरा मिज़ाज कर मुझे फिर कोई ग़म न सता सके वो मुझ सेे नज़रें न हटा सके जुड़ जाए धड़कनें कुछ इस तरह उस दिल से न कभी कोई मिटा सके कोई धड़कन दिल से बिछड़ न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई ग़लतियों पे भी झगड़ न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कभी ख़ुदा भी ज़िद पे अड़ न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है कोई रिश्ता युगों तक उजड़ न पाए तो उसी का नाम आशिक़ी है
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