Kuch Alfaaz

"अश्क" अश्क तेरे हों या मेरे अश्क अश्क होते हैं अश्क का कोई न मज़हब होता है न कोई जात होती है अश्क अश्क होते हैं कभी ये सँभालते हैं तो कभी बिगाड़ते हैं ज़िंदा हैं तो अश्क हैं है बा'द मौत के भी अश्क शजर के अपने अश्क हैं शाख के भी अपने अश्क हैं फूल के अपने अश्क हैं कली के भी अपने अश्क हैं आँख के अपने अश्क हैं ज़ेहन के अपने अश्क हैं लब के अपने अश्क हैं दिल के भी कुछ अश्क हैं दरिया के अपने अश्क हैं समुंदर के अपने अश्क हैं माशूका के अपने अश्क हैं माशूक के अपने अश्क हैं राह चलते राही के अश्क हैं तवायफ़ के अपने अश्क हैं ज़ख़्म के अपने अश्क हैं तो मरहम के अपने अश्क हैं वफ़ा के अपने अश्क हैं बे-वफ़ा के भी अपने अश्क हैं मुफ़्लिसी के अपने अश्क हैं अमीरी के अपने अश्क हैं बिना बाम-ओ-दीवार के अश्क हैं तो बाम-ओ-दीवार में भी अश्क हैं बचपन के थोड़े अश्क हैं जवानी में ज़ियादा अश्क हैं बुढ़ापे तो अश्कों का अश्क हैं ज़रूरी नहीं ग़म के अश्क हैं ख़ुशी के अपने अश्क हैं

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