Kuch Alfaaz

मेरे हाथों ने तुझ को छुआ तक नहीं मुझ को सूरज की उस रौशनी की क़सम तू कहीं भी रहे मैं कहीं भी रहूँ दिल तिरे पास है मैं अज़ल से अबद तक तिरे साथ हूँ तू मिरे साथ है

Yusuf Kamran
WhatsAppXTelegram
Create Image