"जिस का इलाज सिर्फ़ मौत हो" अज़ल से ही हथेली पर लिखी हुई इन दर्द की लकीरों में मैं ढूँढती रहती हूँ तुम्हारे नाम की ख़ुशी मैं नाकाम रहती हूँ शाम-ओ-सहर वो सुकून की तहरीर ढूँढ़ने में फिर समझा लेती हूँ ख़ुद को ये लकीरें वकीरें कुछ नहीं होती लेकिन सच तो यही है तुम्हारी दुनिया में मेरे लिए कोई जगह नहीं फिर ये मलाल हथेलियाँ उठा कर मैं माँग लेती हूँ ख़ुदा से कोई बहुत गहरा ज़ख़्म जिस का इलाज सिर्फ़ मौत हो
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