Kuch Alfaaz

बरखा रुत में आते हैं बादल पानी भर कर लाते हैं बादल आँगन आँगन बरसाते हैं खेतों को तर कर जाते हैं प्यासी धरती के होंटों पर भर जाते हैं अमृत ला कर वर्षा के ये दूत हैं बादल करते हैं धरती को जल-थल फूलों को देते हैं तबस्सुम कोयल को देते हैं तरन्नुम चम-चम बिजली चमकाते हैं एक किरन सी लहराते हैं शोर मचाते हैं गाते हैं चारों तरफ़ ये मंडलाते हैं गीतों की रुत झूलों के दिन कलियों की शब फूलों के दिन वर्षा की रुत भर के लाते बरसाते लहराते जाते

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