Kuch Alfaaz

"बाँसुरी" बाँसुरी श्याम की बज उठी है आज यमुना तलक मनचली है राधिका और ललिता विशाखा श्याम सब को मुरलिया सुनाता गोपियों में अजब बेकली है आज यमुना तलक मनचली है बृज निवासी सभी हैं अनोखे प्रेम में खा चुके लाख धोखे आत्मा प्रीति रस में सनी है आज यमुना तलक मनचली है माँ यशोदा तुम्हें हैं बुलाती और नवनीत भी हैं खिलाती कुंभ पर क्यूँ लगे कंकड़ी है आज यमुना तलक मनचली है कालिया नाग की रानियाँ भी गा रहीं कृष्ण की कीर्तियाँ भी कंस की धृष्टता सूखती है आज यमुना तलक मनचली है

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