“बाप के मरने के बा'द” लुट गई दुनिया हमारी बाप के मरने के बा'द रह गई घर में उदासी बाप के मरने के बा'द हम सेे रूठी शादमानी बाप के मरने के बा'द की ग़मों ने ग़म-गुसारी बाप के मरने के बा'द आह निकली दिल से फिर आँखों से आँसू गिर पड़े बज़्म-ए-शादी जब सजाई बाप के मरने के बा'द हैफ हाए नाज़ से पाले हुए अतफ़ाल ने तर्क कर दी ख़ुश लिबासी बाप के मरने के बा'द याद आया गोद में ले कर निकलना बाप का कमसिनी जब घर से निकली बाप के मरने के बा'द बादशाही में कहाँ हैं बादशाही का मज़ा कह रही है शाहज़ादी बाप के मरने के बा'द बाप है गर ज़िंदगी में ज़िंदगी सब चीज़ है ज़िंदगी है बे-मआ'नी बाप के मरने के बा'द दस्त-ए-शफ़क़त कौन फेरेगा भला सर पर मिरे एक बच्ची रो के बोली बाप के मरने के बा'द लुत्फ़-अंदोज़ी कहाँ अब वो ख़ुशी के पल कहाँ अब है हरदम बे-क़रारी बाप के मरने के बा'द जो कभी रोए नहीं थे हाए उन अतफ़ाल ने ज़िंदगी रो कर गुज़ारी बाप के मरने के बा'द बाप का साया उठा सर से तो ये आया समझ है अज़िय्यत ज़िंदागानी बाप के मरने के बा'द दर्द-ओ-ग़म रंज-ओ-अलम बेचैनियाँ बेताबियाँ हाथ आई है उदासी बाप के मरने के बा'द ज़िंदगी कब ज़िंदगी है ज़िंदगी है इक सज़ा ये हक़ीक़त हम ने जानी बाप के मरने के बा'द सीने पर सर रख के सोती थी जो बच्ची चैन से चैन से पल भर न सोई बाप के मरने के बा'द बाप ज़िन्दा था तो घर के सहन में थे क़हक़हे अब है घर में आह-ओ-ज़ारी बाप के मरने के बा'द दौड़ कर गोदी में लेना और जबीं को चूमना दिल दुखाती है कहानी बाप के मरने के बा'द
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