Kuch Alfaaz

"बचपन" उम्र की इस दहलीज़ पे यूँँ भोलेपन में रहना है ऐ ज़िन्दगी मुझे अब भी उसी बचपन में रहना है ना-समझी के वो सारे क़िस्से और वो कहानियाँ सच्ची थीं उस दौर की बातें भी तो इस दौर से अच्छी थीं मीठी यादों के साए लिए आँखों के दर्पण में रहना है ऐ ज़िन्दगी मुझे अब भी उसी बचपन में रहना है

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