Kuch Alfaaz

"बद-दुआ" हर ख़ता की सज़ा आशिक़ी को मिले बेबसी इस-क़दर ज़िन्दगी को मिले रूठ जाएँ सभी दोस्त तुझ सेे तेरे दिल-लगी के करम दोस्ती को मिलें साँस हैराँ भी हो आँख भी नम रहे रास्ते सैकड़ों बे-ख़ुदी को मिलें ज़िन्दगी में कहीं दौर ऐसा भी हो छोड़ दें सब तुझे जिस किसी को मिले दिल तड़पता रहे रात-दिन याद में हिज्र का फ़ाइदा मय-कशी को मिले याद आएँ तुझे भी सितम फिर तेरे हर सितम लौट के जब तुझी को मिले तू जहाँ भी रहे हो परेशानियाँ फिर बहाना कोई ख़ुद-कुशी को मिले पास 'रेहान' के कोई क़िस्सा हो फिर दास्ताँ इक नई शा'इरी को मिले

Rehaan
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