Kuch Alfaaz

"बे-दर्द" बड़े ही कमज़र्फ़ हैं वो लोग जो दिल नहीं देखते वो मुहब्बत तो जिस्मों से करते हैं पर रूह नहीं देखते वो साज़िश रचते हैं दिलों को चुरा लेने की कम्बख़्त वो दिलों का चैन-ओ-सुकून नहीं देखते कितने कमज़र्फ़ है वो उन्हें इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता है उन्हें जीत मिलेगी या हार वो प्यार की मंज़िल नहीं देखते वो सर-ए-राह इश्क़ को बस बदनाम किया करते हैं वो उस इश्क़ का जुनून नहीं देखते

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