Kuch Alfaaz

बजा है कि बारिशों से पहले भी उदास था जंगल और अब भी है जब हो चुकी है बारिश लगता है ठहर गया है मौसम अंदर का हो गई है जामिद समाअ'त और बसारत देखते सुनते हुए भी जो नज़र आता नहीं है बदलाओ

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