Kuch Alfaaz

बड़ा आसान है मेरे लिए मैं आज़ादी के गीत गाऊँ और सड़कों पर जलसे सजा इंक़लाब के नारे लगाऊँ बड़ा आसान है मेरे लिए मैं किसी पर ज़ुल्म होता पाऊँ तो आँखों वाला अंधा हो जाऊँ बड़ा आसान है मेरे लिए सियासतदानों पर झल्लाऊँ और कुछ करने के नाम पर अपनी मजबूरियाँ गिनाऊँ बड़ा आसान है मेरे लिए कि मैं ज़िंदा लाश हो जाऊँ ख़ुद डरूँ और परिवार को डराऊँ। पर मेरे भीतर जो है एक रूह सी जब पूछती है मुझ से कहाँ जाऊँ ज़िंदा लाश होना भी आसान नहीं मैं इसे कैसे समझाऊँ

Madhav Awana
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