Kuch Alfaaz

"बहाने" क्यूँ आए हो तुम मेरी गली में गाँव में क्यूँ बैठे हो यहाँ मंदिर की छाँव में जहाँ समन के फूल हैं भीड़ है और तुम हो तुम्हारी नज़र में क्या है मेरी नज़र में तुम हो अभी तो हम-तुम मिले भी नहीं हैं अभी मैं ने तुम सेे कुछ कहा भी नहीं है और तुम हो कि उठकर जाने लगे हो कितने झूठे बहाने बनाने लगे हो तुम जा तो रहे हो मगर सुनते जाओ लौट कर जब कभी तुम वापस आओ तो ये न पूछना क्यूँ जाते हुए देखती रही तुम्हें मैं मुस्कुराते हुए

Rahul
WhatsAppXTelegram
Create Image