Kuch Alfaaz

मेरे मालिक क्या हम बांदियाँ हैं जो आग में जला कर मार दी जाएँ हम वो जवानियाँ हैं मोहब्बत के नाम पर जो मसल दी जाएँ हम वो कलियाँ हैं हवस का निशाना बना कर जिन के पर नोच लिए जाएँ हम वो तितलियाँ हैं जो मस्लहत के नाम पर क़ुर्बान कर दी जाएँ हम वो बेटियाँ हैं जो शरई जाएदाद से महरूम कर दी जाएँ हम वो बहनें हैं मेरे मालिक क्यूँँ हम बांदियाँ हैं

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