Kuch Alfaaz

मैं क़ैदी तितली हूँ तेरी सब रंग बहार के हैं तुझ से जब बर्फ़ के मौसम आएँगे हम याद के साज़ बजाएँगे फिर ख़्वाब के तेशे लाएँगे ता'मीर-ए-मोहब्बत करने को तस्ख़ीर-ए-मोहब्बत करने को

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