Kuch Alfaaz

कल भी बारिश हुई थी आज भी बारिश होगी और फिर खोखली अज़्मतें पैदल चलती सड़कों पर कीचड़ उछालते हुए हवा की तरह गुज़र जाएँगी आरास्ता दूकानें ये तमाशा देखेंगी और हँसेंगी

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