Kuch Alfaaz

"बताया था कि मुहब्बत करता हूँ " मैं ने शब्दों में कभी नहीं कहा कि मैं तुम से मुहब्बत करता हूँ क्योंकि मुहब्बत कहने की बात नहीं है मैं ने कभी कोई चिट्ठी भी नहीं लिखी जिस सेे तुम पढ़ पाते कि मैं तुम से मुहब्बत करता हूँ क्योंकि मुहब्बत काग़ज़ पर लिखने की बात नहीं है मैं ने कभी तुम्हें छूने की कोशिश नहीं की जिस सेे तुम जान पाते कि मैं तुम्हें मुहब्बत करता हूँ क्योंकि हवा जिस मुहब्बत से छूती है वैसा छूना मुझे नहीं आता पर मैं तुम्हारे सामने चहरे पर हँसी लाता था जिस प्रकार पेड़ फूल खिलाता है धरती को ये जताने के लिए कि वो उस सेे मुहब्बत करता है

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