Kuch Alfaaz

"बेबसी" वो गीत जिन्हें तुम सुना करते थे वो लम्हें वो फिल्में वो सभी चीज़े अब अक्सर मुझे बहुत सताते है वो कमरा जिस में उस का मन लगता था अब सिर पर हाथ रख कर बैठा है एक अरसे से बस तुम्हारे इंतिज़ार में इन सब चीज़ों की हालत ठीक उसी बच्चे की तरह है जो किसी मेले में अपनी माँ से बिछड़ जाता है तुम सेे जुड़ी हुई हर चीज़ बे-रंग बेजान बेसहारा होकर एक ऐसी बेबस हालत में पड़ी है जिन्हें ना तो अब नींद आती ना ही मौत

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