Kuch Alfaaz

"बेहद मोहब्बत" उस की मुस्कुराहटें मेरा हाथ पकड़ कर मुझ सेे शा'इरी लिखवाती है उस का चेहरा किसी किताब के जैसा देखो तो कुछ भी नहीं पढ़ो तो बहुत कुछ उस की आँखें किसी समुंदर के जैसी देखो तो कुछ भी नहीं डूबो तो बहुत गहरी चुप-चाप सी रहती है ज़्यादा नहीं बोलती पर उस की आवाज़ सुनो तो कोयल से भी प्यारी उस की ज़ुल्फ़ें ज़्यादा घनी नहीं हैं वैसे तो पर उन में उलझ जाए दुनिया सारी वो छाँव है वो धूप है वो मेरी ज़िंदगी का रंग रूप है वो संगीत है जिस को मैं गुनगुनाता हूँ वो साहिल है मेरा जहाँ मैं ठहर जाता हूँ उस की साँसों में जो महक है वो किसी गुलाब में कहाँ उस के चेहरे सी मासूमियत किसी और चेहरे में कहाँ वो तितलियों से प्यार करती है तितलियाँ फूलों को भूल गई वो छूएगी उन्हें आ कर तितलियाँ उस का इंतिज़ार करती है वही प्यार है वही ख़ुमार है उस पर ही जाँ निसार है मुझे तो उस की हर अदा उस के अंग-अंग से प्यार है मेरी बातों में बातें उस की मेरी साँसों में साँसें उस की मेरी ग़ज़लों में वो बसती है मेरी नज़्मों की वो हस्ती है मेरी नींदों में है ख़्वाब वही मेरी आँखों का है आब वही पास नहीं होती वो मेरे फिर भी मेरे साथ है वो मेरे दिल की धड़कन वो ही जीने की इक आस है वो दिल पे रख के हाथ मैं सच में कहता हूँ प्रिंस वो मेरी जान है मैं उस पे मरता हूँ दुनिया में एलान आज ये करता हूँ उस लड़की से बेहद मोहब्बत मैं करता हूँ

Prince Sodhi
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