Kuch Alfaaz

“बेटी बचाइए” बेटी से ये जहान है बेटी बचाइए माँ बाप की ये जान है बेटी बचाइए ये सारी काइनात बदौलत इसी से है सारे जहाँ में फैली मोहब्बत इसी से है बेटी चमेली बनके चमन में महक रही बातों से यूँँ लगे है कि बुलबुल चहक रही बेटी से ख़ानदान है बेटी बचाइए बेटी कहीं पे माँ कही बहना के रूप में पत्नी बहु ये बनके निकलती है धूप में हर काम में हैं हाथ बटातीं ये बेटियाँ हर रूप में हैं प्यार लुटातीं ये बेटियाँ ये घर की आन बान है बेटी बचाइए बेटी को मारिए न बहू को जलाइए बेटी बहन किसी कि हो इज़्ज़त बचाइए बनकर दुल्हन जो आई तो ख़ुशियाँ भी लाएगी माँ बन के एक रोज़ ये ममता लुटाएगी ये दो कुलों की शान है बेटी बचाइए

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