"बेटियाँ" दिल की ठंडक और आँखों की ज़िया हैं बेटियाँ जल के ख़ुद जो रौशनी दे वो दिया हैं बेटियाँ कोई पूछे क़द्र उन से जो यहाँ महरूम हैं वो समझते हैं बताएँगे कि क्या हैं बेटियाँ हैं पराया धन मगर अपनी ही रहती हैं सदा बढ़ के बेटों से बुढ़ापे का असा हैं बेटियाँ बेटियों को बार समझे जो बड़ा बद-बख़्त है रहमत-ए-रब्बी हैं अल्लाह की रज़ा हैं बेटियाँ घर की ख़ुशियाँ रौनक़ें सब इन के दम से हैं रवाँ जो नसीबों को बदल दे वो दुआ हैं बेटियाँ
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