Kuch Alfaaz

"भरोसा" जहाँ में अब किसी का भी नहीं यूँँ साथ होता है अकेले लोग मर जाते हैं यादों में खो कर रौनक हमें मुहब्बत थी हाँ हाँ थी सब मुकर गए अब क्या चला चल ज़िन्दगी के साथ खो कर बस अकेले अब न कर तू अब भरोसा इस जहाँ भर से मेरे रौनक

Raunak Karn
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