Kuch Alfaaz

“बिटिया” घर में ख़ुशी बनकर आई थी रूप परी का धर आई थी दिल की तमन्ना बर आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी पहली दफा़ जब उस को उठाया वो एहसास में लिख नहीं पाया आँख ख़ुशी से भर आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी झूले में जब-जब रोती थी गोद में आ कर चुप होती थी उस में शरारत भर आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी ख़ुशियों की सौगा़त है वो तो सुनती मेरी हर बात है वो तो ले के हसीं मंज़र आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी उस सेे ही रौशन घर है मेरा वो ही दिया है, वो ही सवेरा शम्सो-क़मर बनकर आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी मेरी सुब्ह है शाम वही है राहते-दिल, आराम वही है वो रहमत बनकर आई थी बिटिया मेरी जब घर आई थी

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