Kuch Alfaaz

वो इक सहमा हुआ छोटा सा बच्चा था और उस के इम्तिहाँ नज़दीक थे अपनी किताबों से अभी उस को बहुत चीज़ें ज़बानी याद करना थीं मगर उस रात उस के शहर की सब बत्तियाँ गुल थीं उसे पढ़ना था लेकिन रौशनी बस दूर तोपों के दहानों स निकलती थी

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